राजनीति , भ्रस्टाचार एवं हम

आज भारत कि जनता ( हम ) राजनीति का नाम आते ही उससे भ्रस्टाचार जोड़ लेते हैं पर क्यूँ ?
क्यूँ हम राजनीति को भ्रस्ट समझते हैं ?
क्यों ऐसा लगता है हमें कि जितने भी राजनीतिज्ञ है सब के सब भ्रस्ट है ?
इसका जवाब मै तो नहीं दे सकता पर आप चाहे तो खुद से पूछ सकते हैं शायद खुद आपको पता लग जायेगा कि असलियत क्या है |
कही न कही से हम भी इसमें शामिल है तभी तो हमें हर चीज़ भ्रस्ट नज़र आती है | कही न कही हमारी सोच भी उन मंत्रियो और नेतायों कि तरह भ्रस्ट होती जा रही है | मुझे नहीं लगता कि गलती किसी एक कि है गलती पुरे समाज कि है गलती पुरे व्यववस्था कि है |
यहा खुद कम करता एक कंप्यूटर भी भ्रस्ट है क्युकी वो भ्रस्ट अफशरो के बीच में जो बैठा है |

हम बात करते है बदलाओ कि और बदलता कौन, हम मुह तकते है अपने पडोसी का कि पहले वो बदले, फिर देख कर हम वैसा करेंगे, नहीं तो फिर उस सिस्टम के बदलने का इंतज़ार करते है | अगर वो सही न हुआ तो हम उस कानून व्यवस्था उस सिस्टम को दोषी ठहराते हुए पल्ला झाड़ जाते है कि जब वो नहीं बदल रहा है तो हम कैसे बदल सकते है |
मैंने कुछ लाइन पढ़ा था चेतन भगत जी के what young india wants में जैसा कि उनका कहना था " बदलाओ किसी एक को बदलने से नहीं आता , अगर आप व्यवस्था को बदलने चले तो आपके एक पुरे समाज को बदलना पड़ेगा " और इसका उन्होंने विश्लेषण भी दिया था कि अगर किसी एक समाज में एक इंसान बदलता है तो वो बेवकूफ माना जायेगा क्युकी सिर्फ वही होगा जो कुछ अलग करेगा बाकि सब तो पहले से करते आ रहे है उसे ही सही कहेंगे न |

तो इसी प्रकार से राजनीति में व् कुछ अच्छे लोग जरुर है जो हो सकता है कुछ ऐसा न चाहते हो जिससे देश को नुकसान हो फिर वो अकेले क्या कर सकते है , उन्हें जरुरत है साथ की जनता कि साथ की ताकि वो कुछ कर सके | न ही भारतीय राजनीति बुरी है न ही ये डेमोक्रेटिक सिस्टम गलत है हम जो अपने फायदा के लिए कुछ को कुछ बना के रख देते है |
हाँ ये ज़रूर है कुछ को जरुरत है बदलने की उन्हें अपना जगह दिखने की ........

A Single man can change the map of world so why cant a system can be changed by him !!!!!!

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