तेरी याद- मेरी पहली कविता ।
दिल में जो दबी हुई बात है, वो जो सताती दिन रात है, न सो पाया हूँ रातों को, न जाग रहे मेरे जज़्बात हैं, दिल में दबी हुई जो बात है, वो कुछ नहीं बस तेरी याद है । तन्हा था मैं उन्ही राहों पर, पर मुझे दर्द तो न था इस क़दर, चलता था यूँ मद मस्त मगन, न थी मुझे कभी कोई फिकर, आज ना जाने दिल में क्यूँ इतनी फ़रियादें हैं, दिल में दबी हुई जो बातें है, वो कुछ नहीं बस तेरी यादें है । साथ था तेरा बड़ा प्यारा, यूँ लगता था जैसे मिल गया हो मुझे जहाँ सारा, इश्क़ में डूबा था मैं इन्ही राहों पर, तब तू ही थी जान तू ही सुकून हमारा, तब दिल में ना कोई दबी हुई बात थी, तब तू थी साथ सताती नहीं तेरी याद थी । आज खोया हूँ फिर से उन्ही राहों में, पर आज न जाने क्यूँ मैं हूँ इतना हारा, भले ही होठों पर हो मुस्कान बहुत पर सीने में है दर्द अजब यारा, आज जो फिर से दिल में दबी हुई बात है, वो कुछ खास नहीं वही तेरी याद है ।।