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तेरी याद- मेरी पहली कविता ।

दिल में जो दबी हुई बात है, वो जो सताती दिन रात है, न सो पाया हूँ रातों को, न जाग रहे मेरे जज़्बात हैं,    दिल में दबी हुई जो बात है,    वो कुछ नहीं बस तेरी याद है । तन्हा था मैं उन्ही राहों पर, पर मुझे दर्द तो न था इस क़दर, चलता था यूँ मद मस्त मगन, न थी मुझे कभी कोई फिकर, आज ना जाने दिल में क्यूँ इतनी फ़रियादें हैं,    दिल में दबी हुई जो बातें है,    वो कुछ नहीं बस तेरी यादें है । साथ था तेरा बड़ा प्यारा, यूँ लगता था जैसे मिल गया हो मुझे जहाँ सारा, इश्क़ में डूबा था मैं इन्ही राहों पर, तब तू ही थी जान तू ही सुकून हमारा,    तब दिल में ना कोई दबी हुई बात थी,    तब तू थी साथ सताती नहीं तेरी याद थी । आज खोया हूँ फिर से उन्ही राहों में, पर आज न जाने क्यूँ मैं हूँ इतना हारा, भले ही होठों पर हो मुस्कान बहुत पर सीने में है दर्द अजब यारा,    आज जो फिर से दिल में दबी हुई बात है,     वो कुछ खास नहीं वही तेरी याद है ।।

राजनीति , भ्रस्टाचार एवं हम

आज भारत कि जनता ( हम ) राजनीति का नाम आते ही उससे भ्रस्टाचार जोड़ लेते हैं पर क्यूँ ? क्यूँ हम राजनीति को भ्रस्ट समझते हैं ? क्यों ऐसा लगता है हमें कि जितने भी राजनीतिज्ञ है सब के सब भ्रस्ट है ? इसका जवाब मै तो नहीं दे सकता पर आप चाहे तो खुद से पूछ सकते हैं शायद खुद आपको पता लग जायेगा कि असलियत क्या है | कही न कही से हम भी इसमें शामिल है तभी तो हमें हर चीज़ भ्रस्ट नज़र आती है | कही न कही हमारी सोच भी उन मंत्रियो और नेतायों कि तरह भ्रस्ट होती जा रही है | मुझे नहीं लगता कि गलती किसी एक कि है गलती पुरे समाज कि है गलती पुरे व्यववस्था कि है | यहा खुद कम करता एक कंप्यूटर भी भ्रस्ट है क्युकी वो भ्रस्ट अफशरो के बीच में जो बैठा है | हम बात करते है बदलाओ कि और बदलता कौन, हम मुह तकते है अपने पडोसी का कि पहले वो बदले, फिर देख कर हम वैसा करेंगे, नहीं तो फिर उस सिस्टम के बदलने का इंतज़ार करते है | अगर वो सही न हुआ तो हम उस कानून व्यवस्था उस सिस्टम को दोषी ठहराते हुए पल्ला झाड़ जाते है कि जब वो नहीं बदल रहा है तो हम कैसे बदल सकते है | मैंने कुछ लाइन पढ़ा था चेतन भगत जी के what young india wa...